नोमी चौधरी
०२ -०२ २०१५
हिंदी - ११६
जब में छोटी थी में हमेशा किताबें परती थी. मैं सोने की बजाय किताब परती थी. मैं नाचती भी थी. जब परिवार में एक शादी था में और मेरा पूरा परिवार एक साथ नाचते थे. जब मौसम बहुत गर्मी थी मेरी माँ और में बागबनी करती थी. हमारा बगीचा में टमाटर, खीरा और बहुत कुछ था. जब में ग्यारा साल का था में बांसरी बजाता था. मैं बहुत अच्छा बजाता था. मैं हमेशा बड़े बच्चों के साथ बजाता था. बचपन में जब कुछ करने का नहीं था में और मेरे माता-पिता टी वी देखते थे. बहुत हिन्दी फिल्में देखते थे. बचपन में मैं मेरे बुआ के बहुत वक़्त बिताये. हम दोनो बहुत बातें करते थे और एक साथ बुनाते और खाना पकाते थे. मेरी सड़क पर बच्चें भी थे और हम सब ताश खेलते थे. मैं हमेशा जितने की कोशिश करती थी. मैं मेरे नाना-जी के साथ तशा भी खेलते थे.
०२ -०२ २०१५
हिंदी - ११६
बचपन की यादें
जब में छोटी थी में हमेशा किताबें परती थी. मैं सोने की बजाय किताब परती थी. मैं नाचती भी थी. जब परिवार में एक शादी था में और मेरा पूरा परिवार एक साथ नाचते थे. जब मौसम बहुत गर्मी थी मेरी माँ और में बागबनी करती थी. हमारा बगीचा में टमाटर, खीरा और बहुत कुछ था. जब में ग्यारा साल का था में बांसरी बजाता था. मैं बहुत अच्छा बजाता था. मैं हमेशा बड़े बच्चों के साथ बजाता था. बचपन में जब कुछ करने का नहीं था में और मेरे माता-पिता टी वी देखते थे. बहुत हिन्दी फिल्में देखते थे. बचपन में मैं मेरे बुआ के बहुत वक़्त बिताये. हम दोनो बहुत बातें करते थे और एक साथ बुनाते और खाना पकाते थे. मेरी सड़क पर बच्चें भी थे और हम सब ताश खेलते थे. मैं हमेशा जितने की कोशिश करती थी. मैं मेरे नाना-जी के साथ तशा भी खेलते थे.
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