Thursday, February 5, 2015

Dialogues



फरजाना: नमस्ते रामिसह 
रामिसह: नास्ते फरजाना 
फरजाना: तुम क्या कर रही  हो ?
रामिसह : हम कुछ नहीं कर रही हूँ 
फरजाना: झूट नहीं बोलो 
रामिसह:मैं बॉस साफ कर रहे थी 
फरजाना: वह देक रही थी 
रामिसह:तुम काल क्या रही थी ?
फरजाना: मैं गार पर थी 
रामिसह: मैं तुमसे फ़ोन क्या लेकिन तुम नहीं उठाई 
फरजाना: मैं शाद नीद में थी 
रामिसह: अगली बार मेरी फ़ोन उठाना 
फरजाना: क्यों, कुछ ज़रूरी था ?
रामिसह: नहीं, मुझे तुम्हारा याद आई  थी 
फरजाना:ठीक है, में फिर मिलेंगे 

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